ग्रहण योग – कुण्डली में ग्रहण योग एक प्रकार का प्राकृतिक योग है। इस योग का प्रभाव जातक को परेशान करता है। सूर्य और चन्द्र ग्रह के साथ छाया ग्रहों का संयोग इस योग का निर्माण करता है। यह योग जातक की कुण्डली में जिस भाव को प्रभावित करता है। उस भाव के फलों में कमी आ जाती है। व्यक्ति के कार्यों में बाधा का रहना अधिक अनुभव में आता है।
Trending
- उत्तराखंड में कब होंगे विरुड़ पंचमी, अमुक्ताभरण सप्तमी (डोर सप्तमी) और दूर्वाष्टमी?
- व्रत-पर्व अगस्त 2026
- अगस्त्योदय: वैदिक खगोल विज्ञान की अमूल्य धरोहर
- व्रत पर्व जुलाई -2026
- अगस्त्यार्घ्यदानविधिः
- व्रत-पर्व जून 2026
- निर्जला एकादशी 2026: कठिन व्रत, महान फल – पूरी जानकारी (कथा, विधि, महत्व और दान)
- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी


