🌺 उत्तराखंड में कब होंगे विरुड़ पंचमी, डोर सप्तमी और दूर्वाष्टमी 2026?
जानिए शास्त्रीय नियम, अगस्त्योदय का महत्व और सही तिथियां
उत्तराखंड की पारंपरिक संस्कृति में विरुड़ पंचमी,
अमुक्ताभरण सप्तमी (डोर सप्तमी/सांतूं) तथा
दूर्वाष्टमी (आंठूं) का विशेष धार्मिक महत्व है।
इन पर्वों का निर्धारण केवल तिथि के आधार पर नहीं, बल्कि
अगस्त्य तारा (Canopus) के उदय के आधार पर भी किया जाता है।
इसी कारण उत्तराखंड में इनकी तिथियां सामान्य पंचांग से अलग हो सकती हैं।
🌼 अमुक्ताभरण सप्तमी का शास्त्रीय नियम
धर्मशास्त्रों के अनुसार भाद्रपद शुक्ल सप्तमी यदि
मध्याह्न व्यापिनी हो तो वही ग्राह्य होती है।
यदि सप्तमी दो दिनों में पड़ती हो तो
परा (दूसरे दिन की) सप्तमी ग्रहण की जाती है।
🌿 दूर्वाष्टमी का शास्त्रीय नियम
- भाद्रपद शुक्ल अष्टमी सप्तमी विद्धा होने पर भी ग्राह्य है।
- यदि कन्यार्क, अगस्त्योदय अथवा
अधिक मास (मलमास) हो तो
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को व्रत करना चाहिए। - यदि अधिक मास के कारण भाद्रकृष्ण अष्टमी से पूर्व ही अगस्त्योदय हो जाए
तो श्रावण शुक्ल अष्टमी ग्राह्य मानी गई है।
📜 धर्मग्रंथों में उल्लेख
इदं दूर्वा-पूजनं व्रतं
कन्याऽर्केऽगस्त्योदये च वर्ज्यम्।।
— धर्मसिंधु
भाद्रशुक्लाष्टम्यां अगस्त्योदये भाविनी सति
पूर्व कृष्णाष्टम्यामेव कुर्यात।।
— हेमाद्रि
शुक्ले भद्रपदे मासि दूर्वा-संज्ञा तु साष्टमी।
सिंहार्क एव कर्त्तव्या न कन्यार्के कदाचन।।
सिंहस्थे सोत्तमा सूर्येऽनुदते मुनिसत्तमे।
⭐ अगस्त्योदय का महत्व
अगस्त्य तारा (Canopus) के उदय और अस्त की तिथि प्रत्येक स्थान के
अक्षांश (Latitude) के अनुसार अलग-अलग होती है।
इसी कारण विभिन्न क्षेत्रों में दूर्वाष्टमी की तिथि भी अलग हो सकती है।
📅 अगस्त्य तारा उदय : 01 सितम्बर 2026
🕡 समय : प्रातः 06:28 बजे
📅 उत्तराखंड में वर्ष 2026 की मान्य तिथियां
| पर्व | तिथि |
|---|---|
| 🌾 विरुड़ पंचमी (नाग पंचमी) | 17 अगस्त 2026 |
| 🧵 अमुक्ताभरण सप्तमी (डोर सप्तमी / सांतूं) | 19 अगस्त 2026 |
| 🌿 दूर्वाष्टमी (आंठूं) | 20 अगस्त 2026 |
🙏 निष्कर्ष
उत्तराखंड की लोक परंपरा में इन पर्वों का निर्धारण केवल पंचांग की तिथि से नहीं,
बल्कि अगस्त्य तारा के उदय और
धर्मशास्त्रों में वर्णित नियमों के अनुसार किया जाता है।
इसी कारण उत्तराखंड में विरुड़ पंचमी, डोर सप्तमी और दूर्वाष्टमी की तिथियां
विशेष महत्व रखती हैं।


