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गंगा-दशहरा


पूर्वाह्न व्यापिनी ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को ‘गङ्गा -दशहरा’ पर्व मनाया जाता है। इस दिन पृथ्वी पर गंगावतरण हुआ था  अतएव इस दिन श्री गंगा आदि का स्नान , अन्न-वस्त्रादि का दान, पितृ-तर्पण ,जप-तप, उपासना और उपवास किया जाए तो दस प्रकार के पाप (तीन प्रकार के कायिक, चार प्रकार के वाचिक और तीन प्रकार के मानसिक) दूर होते हैं।

योगाधिक्ये फलाधि स्यात् – इसमें जितने योगों की अधिकता रहे उतना फल अधिक होता है। ये दस योग इस प्रकार हैं –

१-ज्येष्ठ मास

२-शुक्ल पक्ष

३-दशमी तिथि

४-बुधवार

५-हस्त नक्षत्र

६-व्यतिपात योग

७-गरकरण

८-आनंद योग

९-कन्या राशि का चंद्र

१०-वृष राशि का सूर्य  ।

                                      ज्येष्ठ अधिक मास होने की स्थिति में, उसी अधिक मास में यह पर्व मनाया जाता है, शुद्ध में नहीं।

अतः शास्त्रानुसार ज्येष्ठ अधिक मास में गङ्गा-स्नान, पूजनादि करना शुद्ध ज्येष्ठ की अपेक्षा अधिक फलप्रदायक होता है। इस वर्ष 24 मई, 2018 ई., बृहस्पतिवार को अधिक ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी-तिथि के दिन ही श्रीगङ्गा -दशहरा (विशेषकर हरिद्वार में) का पर्व आयोजित होगा। इस दिन हस्त नक्षत्र रात्रि 7घं.-45मि. के बाद व्याप्त रहेगा। कुछ तीर्थ स्थलों पर गङ्गा -दशहरा अधिक मास की अपेक्षा शुद्ध ज्येष्ठ में मनाने की परम्परा है, जोकि शास्त्र-विरुद्ध है। जो व्यक्ति हरिद्वार आदि तीर्थ पर न जा सके, वह घर में ही गङ्गा जल युक्त स्वच्छ जल में मन्त्र पूर्वक, स्नान , आवाहन एवं पूजनादि करें – मंत्र -‘ॐ नमः शिवायै नारायण्यै दशहरायै गङ्गायै नमः॥’

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